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सुल्तान से फरियाद

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग २६

अलग-अलग स्थानों पर भटकने के बाद, श्री मेहेराज सुल्तान के दरबार पहुंचे और दो मास तक उनके अधिकारियों से निवेदन करते रहे, परन्तु सफलता नहीं मिली ।

एक दिन वहां से लौटते समय श्री मेहेराज को एक अरबी व्यक्ति मिला । जब श्री मेहेराज ने उसे अपनी समस्या बताई, तो उसने उन्हें अरबी भाषा में एक प्रार्थना-पत्र लिखकर दिया और समझाया- "जब सुल्तान यहां से निकले, तो उसका छेड़ा पकड़कर कहना कि अपनी जिम्मेदारी अब मैं तुम्हारे गले में डाल रहा हूं । जब हक अल्लाह तआला ईद के रोज़ कज़ा करेंगे, तब मैं उनके सामने तुमसे हिसाब मांगूंगा ।"

जब सुल्तान नमाज के लिए चला, तो रास्ते में श्री मेहेराज ने उसके दावन को इतनी जोर से झटका कि उसकी कस टूट गई । उसके सुरक्षाकर्मी श्री मेहेराज की तरफ दौड़े, तो सुल्तान ने उन्हें रोक दिया और श्री मेहेराज से कहा- "तुम अपनी हकीकत बताओ, मैं सुनना चाहता हूं ।"

तब श्री मेहेराज ने उसके हाथ में रुक्का (पत्र) देते हुए उस अरबी द्वारा सिखाई गई बातें कहीं ।

सुल्तान ने अपना छेड़ा झटका और विस्मित भाव से आसमान की तरफ देखते हुए बोला- "यह तो रोज़ कयामत के दुर्लभ कलाम हैं, जो आज तक मुझे किसी ने नहीं कहे ।"

श्री मेहेराज ने आगे कहा- "अगर मुझ पर जुल्म न हुआ होता, तो मैं आपको ऐसे वचन न कहता । मैं बहुत समय तक आपके दरबार के चक्कर काटता रहा, निराशा मिलने पर ही आपके आगे फरियाद करने आया हूं ।"

तब सुल्तान ने श्री मेहेराज को वचन दिया- "इन्शा अल्लाह तआला, मैं तुम्हारा इन्साफ जरूर करूंगा । तुम्हारी सम्पत्ति तुम्हें दिलवाऊंगा, और जो तुमने मेरा दावन झटकने का गुनाह किया है, उसे भी मैं माफ करता हूं ।"

यह कहकर सुल्तान नमाज अदा करने चला गया और श्री मेहेराज वापस अपने घर आ गए ।

अगली प्रातः सुल्तान ने अपने सिपाहियों को आदेश दिया- "उस आदमी को बुला लाओ, जिसने मार्ग में मेरा दावन झटका था । पहले मैं उसका इन्साफ करूंगा क्योंकि उसने मुझे खुदा का वास्ता दिया है ।"

सिपाहियों के पुकारने पर श्री मेहेराज उपस्थित हो गए । तब दो सिपाहियों ने उनकी दोनों बाजुओं को पकड़कर, उन्हें सुल्तान के सामने खड़ा कर दिया ।

सुल्तान ने श्री मेहेराज से हिन्दुस्तान की बातें पूछीं, फिर वहां पर इस्लाम की हकीकत पूछी । बाद में उसने श्री मेहेराज से पूछा कि उन्होंने दीवान से फरियाद क्यों नहीं की ? तब श्री मेहेराज ने उसे दण्ड से बचाने के लिए झूठ कह दिया कि वे उसके पास गए ही नहीं । सुल्तान सब कुछ समझ गया और उनकी दया भावना से बहुत प्रभावित हुआ ।

अब सुल्तान ने शेख सल्ला के नाम हुक्म पत्र जारी किया- "खेता भाई की सारी सम्पत्ति श्री मेहेराज को तुरन्त सौंप दी जाए । यदि तुम मेरे हुक्म को नहीं मानते हो, तो मैं तुम्हें जड़-मूल से उखाड़ दूंगा ।"

सुल्तान के हुक्म से श्री मेहेराज को खेता भाई की सारी धन-सम्पत्ति प्राप्त हो गई । श्री मेहेराज ने सद्गुरु धनी श्री देवचन्द्र जी को खेता भाई के निधन का समाचार भिजवा दिया था । श्री देवचन्द्र जी ने बिहारी जी और श्याम जी को श्री मेहेराज की सहायता के लिए अरब भेज दिया ।

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