श्री मेहेराज का सद्गुरु से अलगाव
श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग २७
श्री मेहेराज ने बिहारी जी और श्याम जी को सारी चल सम्पत्ति और लेखा-जोखा सौंप दिया तथा उन्हें पूरा घटनाक्रम कहकर सुना दिया, परन्तु उन दोनों के मन में पाप था । उन दोनों ने सारा धन हड़प लिया और अरब से वापस लौटकर बाल बाई से चुगली कर दी कि श्री मेहेराज सारा धन हड़पना चाहते हैं ।
बिहारी जी और श्याम जी की झूठी बातों से प्रभावित होकर बाल बाई ने जामनगर के राजा से शिकायत कर दी- "मेहेराज अरब से मेरे भाई की सम्पत्ति लेकर आ रहा है । वह उस सम्पत्ति को हड़पना चाहता है ।"
वि.सं. १७०८ में जब श्री मेहेराज शेष अचल सम्पत्तियों को बेचकर भारत लौटे, तो जामनगर के राजा ने सारा धन जब्त कर लिया । श्री मेहेराज के लिए यह बहुत दुखद था कि अरब में इतने कष्ट सहने के बाद भी उन पर धन हड़पने का झूठा आरोप लगाया गया ।
श्री मेहेराज दो वर्ष तक नवतनपुरी में रहे । उनके मन में सद्गुरु धनी श्री देवचन्द्र जी से मिलने की बहुत इच्छा थी, परन्तु फिर भी वे उनके पास नहीं गए । श्री मेहेराज उनसे मिलने के लिए तड़पते रहे, परन्तु न तो उन्होंने बुलाया और न वे स्वयं गए ।
धाम धनी ने दिखा दिया कि यह माया कितनी शक्तिशाली है, जिसने धाम की आत्माओं में अलगाव पैदा कर दिया ।
श्री मेहेराज अपने भाई श्यामल के घर पर रह रहे थे, जिन्हें कभी सद्गुरु महाराज के अपमान के लिए वे मारने दौड़े थे । एक दिन उसी बात को याद करते हुए उनकी भाभी (श्यामल की पत्नी) ने उन्हें ताना मारा । भाभी के कठोर शब्दों से उदास होकर श्री मेहेराज धरोल चले गए ।
धरोल के राजा कला जी के पास वे दो वर्ष तक नौकरी करते रहे । इसके पश्चात् आठ महीने अहमदाबाद में राजकीय कार्य से रहे ।
धाम धनी श्री देवचन्द्र जी से अलग रहना श्री मेहेराज के लिए बहुत कष्टदायी था । पहले चार वर्ष अरब में अलग रहे, फिर भारत में भी चार-पांच वर्ष धनी से दूर रहे । इन अलगाव के वर्षों में श्री मेहेराज अत्यधिक विरह-दुःख में डूबे रहे । यह सारा वर्णन प्रकास और खटरूती ग्रन्थों में किया गया है ।
अहमदाबाद से लौटने के बाद श्री मेहेराज ने कला जी से पदमुक्ति के लिए निवेदन किया । अब उनका मन सांसारिक कार्यों में नहीं लग रहा था और वे एकान्त में धनी की सेवा-ध्यान करना चाहते थे ।
कला जी ने उन्हें छुट्टी देने के लिए शर्त रखी- "आप अपने समान योग्य व्यक्ति ढूंढकर, उसे कार्य-व्यवहार की जिम्मेदारी सौंपकर जा सकते हैं ।"
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