समाधि | Samaadhi
योग द्वारा प्राप्त होने वाली सर्वोच्च अवस्था समाधि है । यह जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति से परे की दुर्लभ चौथी अवस्था है । इसे तुरीय अवस्था भी कहते हैं । समाधि दो प्रकार की मानी जाती है-
- सम्प्रज्ञात
- असम्प्रज्ञात
सम्प्रज्ञात समाधि
सम्प्रज्ञात समाधि में संकल्प-विकल्प चलते रहते हैं । इसे बीज समाधि भी कहते हैं ।
असम्प्रज्ञात समाधि
असम्प्रज्ञात समाधि में संकल्प-विकल्प भी समाप्त हो जाते हैं और जीव अपनी शुद्ध अवस्था को प्राप्त हो जाता है । यह सम्प्रज्ञात समाधि से परे की अवस्था है । इसे निर्बीज समाधि भी कहते हैं ।
क्या समाधि में परब्रह्म प्राप्त हो जाते हैं?
जहां तक बुद्धि, तुरीय (समाधि अवस्था), दृष्टि, श्रवण तथा मन की पहुंच है और जो वचनों में वर्णित किया जा सकता है, यह सब उत्पन्न होकर नष्ट होने वाला है अर्थात् नश्वर है ।1
(1) कलस हिन्दुस्तानी 2/13
