समर्पण | Samarpan
समर्पण का अर्थ होता है अर्पित या न्यौछावर करना । परब्रह्म के प्रति समर्पण करने में सबका हित है ।
यदि (प्रियतम के लिए) मैं अपना जीव देने में संकोच करती हूं, तो मेरा धर्म कैसे सुरक्षित रहेगा ? विरह के सामने जीव (पंचभौतिक शरीर) का क्या महत्व है ? यह बात कहने में भी मुझे शर्म लगती है ।1
मैं (इन्द्रावती) माया के इस शरीर और जीव को काटकर, टुकड़े करके उस दिशा पर न्यौछावर कर दूं, जिस दिशा में तेरा विरह मिलता है ।2
(1) कलस हिन्दुस्तानी 8/6 (2) कलस हि. 8/7
