शरीर
संसार के पांच तत्वों से बने भौतिक आकार को शरीर कहते हैं । शरीर को देह, तन, जिस्म, बदन, आदि भी कहते हैं । जब शरीर के अन्दर जीव समा जाता है, तो वह चेतन कहलाता है ।
शरीर से मोह
इस प्रकार की एक आंकड़ी (फंदा) है, जो जोर से बंधी है । (संसार के लोग) आत्मा को झूठा समझते हैं और शरीर को सच्चा मानते हैं ।1
शरीर से सगापन बनाकर रखते हैं और आत्मा (चेतना) की कुछ पहचान नहीं होती । सबने यह मान लिया है कि शरीर से ही सम्बन्ध पालना है । शरीर को नहलाते हैं, सुगन्धित लेप लगाते हैं, प्रेम से भोजन करवाते हैं, स्नेह से सेवा करते हैं, परन्तु उनकी नजर खाक (मिट्टी) से बंध जाती है ।2
जब शरीर से जीव निकल जाता है, तब अपने हाथों से शरीर को जला देते हैं । जो अब तक स्नेह से सेवा करते थे, सो ऐसा सम्बन्ध निभाते हैं । हाथ, पैर, मुख, नेत्र, नाक, आदि सब उसी शरीर के अंग हैं, परन्तु जिसके साथ प्यार था अब उसी से घर को छूत लग जाती है ।3
शरीर की नश्वरता
सच्चे को झूठा कहते हैं (अमर आत्मा को मानते नहीं) और झूठे को सच्चा कहते हैं (नश्वर शरीर को अमर मानते हैं) । मैं स्पष्ट रूप से दिखाती हूं कि सब झूठे (नश्वर संसार) में मग्न हैं ।4
(1) कलस हिन्दुस्तानी 16/6 (2) कलस हि. 16/7,8 (3) कलस हि. 16/9,10 (4) कलस हि. 16/23
