शिव
प्रजा (जीवों) का नाश भगवान शिव द्वारा होता है । उन्हें शंकर, महेश, महादेव, भोलेनाथ, नीलकण्ठ, रूद्र, महाकाल, आदि नामों से भी जाना जाता है । वे वैकुण्ठ में कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं । उनकी पत्नी का नाम पार्वती है ।
भगवान शिव अपने हाथ में त्रिशूल और गले में सर्प धारण किए रहते हैं । वे सदैव परब्रह्म के ध्यान में लीन रहते हैं ।
शिव द्वारा परब्रह्म के दर्शन
भगवान शिव को अक्षर और अक्षरातीत का ज्ञान नहीं है । जब द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया, तब अनहोनी घटना के रूप में पहली बार परब्रह्म अक्षरातीत अपने आवेश स्वरूप से संसार में आए और श्री कृष्ण के अन्दर प्रवेश करके लीला करने लगे ।
शिव जी को इसका ज्ञान हो गया कि परब्रह्म संसार में आए हैं । अतः वे भिक्षुक के रूप में उनका दर्शन करने ब्रज में गए । श्री कृष्ण के बाल्य रूप का दर्शन करके वे धन्य-धन्य हो गए ।
कुछ लोग अज्ञानतावश कहते हैं कि शिव जी भगवान विष्णु के अवतार का दर्शन करने गए थे, जो कि असत्य है । भगवान विष्णु से तो वे कभी भी वैकुण्ठ में भेंट कर सकते थे, फिर इसके लिए संसार में भिक्षुक बन कर जाने की क्या आवश्यकता थी ? उनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ परब्रह्म का दर्शन करना था ।
