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विषय-सूची

कृष्ण

जब परब्रह्म इस संसार में आए, तब उन्होंने श्री कृष्ण के रूप में अपनी सखियों के साथ प्रेम की लीला की ।

श्री कृष्ण को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे- श्याम, सांवरिया, बाल मुकुन्द, बांके बिहारी, माधव, गिरधर, मुरली मनोहर, ब्रजेश्वर, रासेश्वर, कन्हैया, वासुदेव आदि ।

श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ था । उन्हें जन्म देने वाले माता-पिता का नाम था- देवकी और वसुदेव । उनका पालन करने वाले माता-पिता का नाम था- यशोदरा और नन्द ।

श्री कृष्ण के माध्यम से ब्रह्मलीला

श्री कृष्ण में विराजमान होकर परब्रह्म श्री राज ने दो लीलाएं कीं-

  1. ब्रज लीला
  2. रास लीला

श्याम (कृष्ण) का जो दो भुजा वाला स्वरूप था, उसमें अक्षर की आत्मा और धाम धनी (अक्षरातीत) का जोश था । यह खेल सभी सखियों ने देखा । हम प्रियतम के साथ बहुत आनन्दपूर्वक खेले ।1

श्री कृष्ण की त्रिधा लीला

संसार में श्री कृष्ण के रूप में तीन अलग-अलग स्वरूपों ने क्रम से तीन प्रकार की लीला की-

  1. अक्षरातीत द्वारा ब्रज लीला
  2. अक्षर की सुरताओं द्वारा प्रतिबिम्ब लीला
  3. भगवान विष्णु द्वारा अवतारी लीला

वसुदेव जिस बालक को लेकर गोकुल गए, उसे (भगवान विष्णु का) अवतार न कहिए । वह स्वरूप तो इस हद (क्षर जगत) का नहीं है । उसके द्वारा पार की अखण्ड लीला (प्रेम लीला) की गई है ।2

अक्षरातीत ने ब्रज में 11 वर्ष 52 दिन तक प्रेम की लीला करी ।

श्री कृष्ण (गोलोकी स्वरूप) ने ग्यारह दिन भेष लीला करी, जिसमें ग्वाल बालकों के भेष में ग्वालों संग खेले । सात दिन गोकुल में (प्रतिबिम्ब की रास) लीला करी तथा चार दिन मथुरा में युद्ध लड़ा ।3

मथुरा में उन्होंने धनुष तोड़ा, हाथी (कुबलयापीड़) तथा पहलवान (चाणूर व मुष्टिक) को मारा । उसके पश्चात् कंस को मारकर वसुदेव को बन्ध से छुड़ाया (और ग्वाल भेष को त्यागकर राजसी वस्त्र धारण किया) । तब चार दिन हो गए । इस दिन से (भगवान विष्णु का) अवतार शुरु होता है ।4

अब आगे की लीला हद (भगवान विष्णु) की है, जो चौदह लोक तक सीमित है । लोग अनुमान से कुछ और ही बात करते हैं कि श्री कृष्ण की सम्पूर्ण लीला भगवान विष्णु की है ।5



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/30 (2) कलस हिन्दुस्तानी 18/14 (3) कलस हि. 18/18 (4) कलस हि. 18/19 (5) कलस हि. 18/20