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क्षर-अक्षर-अक्षरातीत | Kshar-Akshar-Aksharaateet

दो पुरुष कहे जाते हैं - क्षर और अक्षर । समस्त प्राणी क्षर हैं और अक्षर कूटस्थ (अचल, अविनाशी) हैं । जिन्हें परमात्मा या ईश्वर कहते हैं, वह उत्तम पुरुष इनसे भिन्न हैं ।1

क्षर, अक्षर और अक्षरातीत के भेद को समझे बिना कोई भी परमात्मा को नहीं जान सकता । तारतम ज्ञान के आने के बाद इस रहस्य से पर्दा हटा है ।



(1) गीता - अध्याय 15