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विषय-सूची

क्षर

क्षर का अर्थ होता है नश्वर । क्षर के अन्तर्गत आने वाला सब कुछ पहले उत्पन्न होता है और फिर कुछ काल पश्चात् नष्ट हो जाता है ।

स्थान

यह अन्धकारमय ब्रह्माण्ड क्षर कहलाता है, जिसमें अनन्त सूर्य और लोक हैं । इसे कालमाया, हद, भवसागर, स्वप्न, खेल, संसार, जगत, आदि नामों से भी जाना जाता है ।

स्वामी

क्षर जगत के स्वामी क्षर पुरुष हैं जिन्हें आदिनारायण, विराट पुरुष, महाविष्णु, आदि नामों से भी जाना जाता है ।

सृष्टि

क्षर जगत में रहने वाली सृष्टि को जीव या जीव सृष्टि कहते हैं ।

लीला

क्षर जगत में जन्म-मरण, दुःख-सुख, द्वैत, आदि की लीला होती है ।