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परमहंस

परमधाम की ब्रह्मसृष्टियों के लिए परमहंस शब्द का प्रयोग किया जाता है । उनमें भी विशेष तौर पर उन्हे परमहंस कहा जाता है, जिन्होंने श्री राज श्यामा जी का दर्शन कर लिया हो ।

धाम में 12000 ब्रह्मसृष्टियां हैं । संसार में आने का बाद, निजानन्द (प्रणामी) समाज के संस्थापक सद्गुरु देवचन्द्र (श्यामा जी) ने 313 ब्रह्मसृष्टियों को पहचान लिया था । बाद में, श्री जी साहिब के साथ 500 ब्रह्मसृष्टियों का वर्णन है । उनके साथ ही पांचवे दिन की लीला समाप्त हो गई । चौथे व पांचवे दिन के परमहंसों की लीला का वर्णन बीतकप्राणनाथ लीलामृत में पढ़ा जा सकता है ।

यहां पर छठे दिन (अगले चार सौ वर्ष) में होने वाले कुछ परमहंसों का वर्णन किया जा रहा है । परमहंसों द्वारा उनके जीवन में किए गए त्याग और समर्पण से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए ।

छठे दिन के कुछ परमहंसों के नाम