परमहंस | Paramhans
परमधाम की ब्रह्मसृष्टियों के लिए परमहंस शब्द का प्रयोग किया जाता है । उनमें भी विशेष तौर पर उन्हे परमहंस कहा जाता है, जिन्होंने श्री राज श्यामा जी का दर्शन कर लिया हो ।
धाम में 12000 ब्रह्मसृष्टियां हैं । संसार में आने का बाद, निजानन्द (प्रणामी) समाज के संस्थापक सद्गुरु देवचन्द्र (श्यामा जी) ने 313 ब्रह्मसृष्टियों को पहचान लिया था । बाद में, श्री जी साहिब के साथ 500 ब्रह्मसृष्टियों का वर्णन है । उनके साथ ही पांचवे दिन की लीला समाप्त हो गई । चौथे व पांचवे दिन के परमहंसों की लीला का वर्णन बीतक व प्राणनाथ लीलामृत में पढ़ा जा सकता है ।
यहां पर छठे दिन (अगले चार सौ वर्ष) में होने वाले कुछ परमहंसों का वर्णन किया जा रहा है । सभी परमहंसों ने कठोर साधना करके परम निधि पाई, श्री प्राणनाथ पर अटूट श्रद्धा रखी, और सदैव सात्विक शाकाहारी भोजन पर निर्वाह किया । परमहंसों द्वारा उनके जीवन में किए गए त्याग और समर्पण से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए ।
छठे दिन के कुछ परमहंसों के नाम
- श्री अहदी मकुन्द दास (मलिहाबाद)
- श्री भैया सीताराम (कमालिया)
- श्री बाबा दयाराम (मल्काहांस)
- श्री जीवन मस्तान (सुल्तानगंज)
- श्री गोपाल मणि (फूलपुर भैयां)
- श्री साधू बाबा (टिकुरी)
- श्री युगल दास (भाण्डेर)
- श्री चतुर दास (मटियारी)
- श्री चेतन दास (गंगापुर)
- श्री श्याम दास (सूरत)
- श्री कामता दास (तिघरी)
- श्री नारायण दास (सोनगीर)
- श्री राम रतन दास (शेरपुर)
- श्री मंगल दास (कालिम्पोंग)
- श्री चमेल सिंह (रारधना)
