राज श्यामा
धाम में युगल स्वरूप श्री राज और श्यामा जी विराजमान हैं । उनके और ब्रह्मसृष्टियों के बीच दिव्य प्रेम की लीला होती है । उनके लिए ही अक्षरातीत, श्याम श्यामा, सच्चिदानन्द, आदि नामों का प्रयोग होता है ।
जो कोई अपने वतन की प्रमुख ब्रह्मसृष्टि हो, अब इस विचार को सुनना । हमारे प्रियतम श्री श्यामा श्याम हैं और हमारा घर निजधाम है । वही अक्षरातीत का अखण्ड घर है ।1
(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/8,9
