बाग में सैनिकों से संघर्ष
श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग १२६
गढ़ा जाते समय मार्ग में श्री जी एवं सब सुन्दरसाथ एक बाग में ठहर गए । उधर गुलाम मुहम्मद अपनी सेना के साथ रामनगर पहुंच गया । श्री जी को वहां न पाकर, उसने अपने सैनिकों को उनकी खोज में भेजा ।
उसके पांच सैनिक गढ़ा में श्री जी तक पहुंच गए और उन्हें बाग में रोक लिया । तभी देवकरण वहां आ गए और उनसे सैनिकों की बात होने लगी । वहां पर उन सैनिकों से चार प्रहर (१२ घण्टे) तक मोमिनों की बहस चलती रही ।
जब हादी श्री जी साहिब जी ने सनन्ध की चौपाइयां बोलीं, तो उन्हें सुनकर वे सैनिक नतमस्तक हो गए । सूर्योदय से पहले ही वे भाग गए ।
वे सैनिक जाते समय आपस में बात कर रहे थे- "हम पर बड़ी खैर (कृपा) हुई । ये तो खुदा के वली (मित्र) हैं । अगर हमसे कोई बेअदबी (अपमान) हो जाती, तो हमारा बुरा होता और हमें कोई ठिकाना नहीं मिलता ।"
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