श्री जी साहिब जी | Shri ji Saheb ji
जब श्री मेहेराज के अन्दर अक्षरातीत का स्वरूप विराजमान हुआ, तब सुन्दरसाथ उन्हें प्रेम से श्री प्राणनाथ या श्री जी साहिब जी कहने लगे ।
तारतम की पहली चौपाई उनका परिचय इस प्रकार देती है-
जिनका नाम श्री जी साहिब है, वे अनादि और अक्षरातीत हैं । वे धाम की समस्त निधियों सहित अब (कलियुग में) संसार में जाहिर हुए हैं ।1
(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/1
