जामनगर के सुन्दरसाथ पर संकट
श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग ३६
वि.सं. १७१९ में कुतुब खान ने जामनगर पर आक्रमण कर दिया । उस समय श्री जी को अन्तःप्रेरणा हुई कि सुन्दरसाथ पर कुछ संकट आने वाला है ।
तब श्री प्राणनाथ जी भागकर जूनागढ़ से जामनगर आ गए और बिहारी जी से इस संकट के विषय में चर्चा करने लगे ।
जामनगर राज्य ने कर नहीं चुकाया था । ऐसे में यह सम्भावना थी कि कुतुब खान जामनगर की जनता पर अत्याचार करेगा ।
सुन्दरसाथ को इस संकट से बचाने के लिए श्री प्राणनाथ जी ने वि.सं. १७२० में जामनगर के दीवान का पद पुनः ग्रहण कर लिया और कर चुकाने की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली । इस कारण उन्हें अहमदाबाद में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा ।
अन्त में, इस झंझट से मुक्ति मिलते ही, श्री जी ने माया के सब कार्य छोड़ दिए और पूरी तरह से जागनी कार्य में लग गए ।
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