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विषय-सूची

जागनी

जब आत्मा को तारतम ज्ञान प्राप्त हो जाए, परब्रह्म के स्वरूप का दर्शन हो जाए, तथा परब्रह्म से अपने सम्बन्ध की पहचान हो जाए, तभी उसकी जागनी या जाग्रति मानी जा सकती है ।

आत्मा की जागनी

यदि किसी ने गफलत (असावधानी) करी और अपना दिल देकर जागी नहीं, सो यहां लोक (जागनी लीला) एवं अलोक (दर्शन, प्रेम व आनन्द) का कुछ भी लाभ नहीं ले सकेगी । (वह सखी) लाभ तो नहीं ले सकेगी, परन्तु (धाम में) सबके सामने उसकी हंसी होगी ।1

जागनी करने की शोभा महामती जी को है

मैं (इन्द्रावती) तो अपना (जीवन) दे रही थी, परन्तु तुमने ही जीव को सुरक्षित रखा । आपने शक्ति देकर अपने कार्य (सुन्दरसाथ की जागनी) के लिए मुझे खड़ा किया ।2

(प्रियतम ने) अपना अंग, (धाम की) बुद्धि और आवेश (शक्ति) देकर मुझ (इन्द्रावती) से कहा- तू मुझे प्यारी है । तुझे हुकम करता हूं कि सब (ब्रह्मसृष्टियों) को (जागनी का) सुख दो ।3

जब तक विकार न निकाल दूं, तब तक आप जाग्रत कैसे होंगे ? जाग्रत हुए बिना इस (जागनी) रास के निज सुख किसी के द्वारा नहीं लिए जा सकते ।4

मुझ पर प्रियतम का आवेश है, जिससे मैं सुहागिनों को एकत्रित करूंगी । सब सुहागिन मिल कर मूल वतन (धाम) का सुख लेंगी ।5

जागनी लीला का सुख

हम (ब्रह्मसृष्टियों) ने कालमाया का खेल उसमें मिलकर (नश्वर शरीर में बैठकर) देखा है । अब जागनी लीला के सुख देखो । इससे सबके हृदय निर्मल हो जाएंगे ।6

तब विध-विध के विलास (प्रेममयी लीला) होंगे और सबको अपार हर्ष होगा । सभी आपस में विनोद करके आनन्द लेंगी । सकुण्डल और सकुमार भी आएंगी ।7

सब सुहागनी आकर (श्री प्राणनाथ के चरणों में) रहेंगी, तब वे अखण्ड सुख लेंगी । बाद में यह बात सबमें जाहेर हो जाएगी, तब ब्रह्माण्ड का प्रलय हो जाएगा ।8

परात्म की जागनी कब होगी ?

और यह शब्द भी सही हैं कि पिया (परब्रह्म) ही परदा (अज्ञानता) दूर करेंगे । जब सब (आत्माएं) मिलकर उनके चरणों में आएंगी, तब हम पिया के सामने खड़े (धाम में जाग्रत) होंगे ।9

मैं सब सैयों को आवेश का हिस्सा देऊंगी, जिससे उनके मनोरथ पूर्ण हो जाएंगे और सब मिलकर हर्ष से घर (धाम) में जाग्रत होंगी ।10



(1) कलस हिन्दुस्तानी 11/28,29 (2) कलस हि. 8/9 (3) कलस हि. 9/30 (4) कलस हि. 21/22 (5) कलस हि. 21/13 (6) कलस हि. 21/12 (7) कलस हि. 21/14 (8) कलस हि. 21/15 (9) कलस हि. 2/53 (10) कलस हि. 21/16