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ठट्ठानगर पुनः आगमन

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग ५०

श्री प्राणनाथ जी अब्बास बन्दर से कोग बन्दर आए और वहां से लाठी बन्दर पहुंच गए । वहां चार दिन रहकर वे ठट्ठानगर आ गए ।

श्री जी के आगमन का समाचार सुनकर नाथा जोशी उन्हें लेने के लिए दौड़े । अन्य सुन्दरसाथ भी उनसे मिलने के लिए निकल पड़े । मार्ग में श्री जी से सब सुन्दरसाथ की भेंट हो गई । श्री जी के दर्शन पाकर सुन्दरसाथ को बहुत सुख प्राप्त हुआ और उनके सभी सांसारिक कष्ट मिट गए ।

श्री जी ने ठाकुरी बाई और जिन्दादास के घर निवास किया, जहां सब सुन्दरसाथ उनसे मिलने के लिए आने लगे । ठाकुरी बाई ने श्री जी, श्री बाई जी, और अन्य सुन्दरसाथ को बहुत श्रद्धा से तरह-तरह की शाक-सब्जी के साथ भोजन कराया ।

यह वि.सं. १७२८ के वैशाख मास का समय था । श्री जी के आने का समाचार सुनकर सुन्दरसाथ बहुत उत्साहित हो गए और अपने-अपने घरों से खाने की वस्तुएं लेकर उनके दर्शन के लिए आने लगे । श्री जी ने सुन्दरसाथ को अब्बास बन्दर की पूरी बीतक कह सुनाई, जिसे सुनकर सुन्दरसाथ का मनोबल बढ़ा और उन्हें आनन्द की अनुभूति हुई ।

ठट्ठानगर के साथ-साथ मटहरी के सुन्दरसाथ भी श्री जी के दर्शन के लिए आने लगे ।

तद्पश्चात् श्री जी ने बिहारी जी को पत्र में दीव बन्दर, ठट्ठानगर, मस्कत, अब्बास बन्दर और अन्य स्थानों की सारी घटनाओं का ब्यौरा लिखकर नवतनपुरी (जामनगर) भेजा । आगे श्री जी कच्छ जाने वाले थे । इसलिए उन्होंने बिहारी जी को कच्छ आने का निवेदन किया, जहां श्री जी उनसे भेंट करने के इच्छुक थे ।

श्री जी के पहले पत्र के उत्तर में बिहारी जी ने कच्छ आने से मना कर दिया ।

जब श्री जी ने दोबारा विश्वनाथ जी को नवतनपुरी भेजा, तब बिहारी जी आने के लिए राजी हुए । श्री जी के साथ श्यामल दास थे, जिन्होंने सब जगह पैगाम भिजवा दिया ।

बिहारी जी को पाती भेजने के बाद श्री जी ने ठट्ठानगर के सुन्दरसाथ से आग्रह किया कि वे उन्हें कच्छ जाने की स्वीकृति दे दें क्योंकि वहां उनकी भेंट बिहारी जी से होनी है, परन्तु सुन्दरसाथ नहीं चाहते थे कि श्री जी उन्हें छोड़कर जाएं ।

कुछ दिनों तक इसी विषय पर बातचीत चलती रही । एक मास वहां रहने के पश्चात् सुन्दरसाथ ने श्री जी को विदा किया ।

ठट्ठानगर से चलकर श्री जी लक्ष्मणपुर गए और वहां सुन्दरसाथ को जाग्रत किया । वहां जो चर्चा हुई, उसका वर्णन भी बिहारी जी को पाती में लिखकर भेजा । फिर लक्ष्मणपुर से चलकर नलिया (कच्छ) पहुंचे ।

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