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श्री प्राणनाथ का दिल्ली आगमन

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग ६४

दिल्ली में श्री जी साहिब जी के आने का समाचार मिलते ही सब ओर से सुन्दरसाथ उनके चरणों में आने लगे ।

ठट्ठानगर से बहुत सुन्दरसाथ यहां आ गए । हरिराम चौधरी, चिन्तामणि, और लालमणि श्री जी के चरणों में आए ।

जब श्री जी दिल्ली में सैयद की हवेली में निवास कर रहे थे, उस समय श्री मुकुन्ददास भी आए । उन्होंने सूरत में श्री जी के मुख से तारतम ज्ञान की चर्चा सुनी थी और उनकी आत्मा जागकर खड़ी हो गई थी ।

इस प्रकार बहुत से सुन्दरसाथ दिल्ली में आकर श्री जी से मिले । कुछ तो उनके साथ रह गए, कुछ दर्शन करके वापस लौट गए परन्तु घर लौटने पर भी उनकी श्रद्धा बनी रही । कुछ ऐसे भी थे, जो मुनकर हो गए और श्रद्धा नहीं ला सके ।

कुछ दिन पश्चात् गोवर्धन भाई अटक से लौटे, जिन्हें श्री जी ने राजा जसवन्त सिंह को सन्देश देने के लिए भेजा था । गोवर्धन भाई लाल दरवाजे पर गंगाराम की दुकान पर आकर रुके । वहां उन्होंने गंगाराम और आशाजीत को प्रबोधित किया । फिर नैनसुख महाजन को दो-चार वचन सुनाए, जिसे उसने अपने दिल में बहुत विचार किया ।

गोवर्धन भाई दिल्ली में श्री जी को खोजने लगे । जब वे उर्दू बाजार में घूम रहे थे, तब उन्हें गरीबदास मिल गए । जब उन्हें पता चला कि श्री जी विट्ठल गौड़ के मोहल्ले में सैय्यद की हवेली में निवास कर रहे हैं, तो वे अपने द्वारा जाग्रत किए गए सुन्दरसाथ को लेकर उनके चरणों में पहुंच गए । श्री जी से भेंट करके उन्होंने जसवन्त सिंह से मिलने का पूरा घटनाक्रम कह सुनाया ।

श्री जी छह मास तक सैय्यद की हवेली में रहे । उसके बाद लाल दरवाजे के पास किसी क्षत्रिय की हवेली में दो मास तक रहे ।

सुल्तान औरंगज़ेब के तन में परमधाम की सकुमार बाई की आत्मा थी, किन्तु दज्जाल (अज्ञानता) के वशीभूत होने के कारण वह हिन्दुओं पर अत्याचार कर रहा था । उसे जाग्रत करने के लिए श्री जी और लालदास जी ने रात-दिन मेहनत करके कुरान से २२ प्रश्नों की एक पाती (पत्र) तैयार की ।

क्षत्रिय की हवेली में बैठकर श्री जी प्रमुख सुन्दरसाथ के साथ विचार-विमर्श करने लगे कि किस प्रकार औरंगज़ेब तक सन्देश पहुंचाया जाए ?

जब आशाजीत ने उस पाती को सुना तो वह बोला- "यह पाती औरंगज़ेब कभी नहीं देखेगा । वह तो हिन्दुओं से शत्रुता रखता है और प्रातः किसी हिन्दू का मुख देखना पसन्द नहीं करता । फिर वह हिन्दी भाषा (देवनागरी लिपि) में लिखी हुई पाती को क्यों सुनेगा ? यहां मुसलमानों का शासन है और वे सख्ती से शरीयत का पालन करते हैं ।"

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