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सद्गुरु | Sadguru

सद्गुरु कहलाने का अधिकार सिर्फ उसे है, जिसने परब्रह्म का दर्शन कर लिया हो ।

सद्गुरु की पहचान

ऐसा तो कोई नहीं मिला, जो दोनों पार (पक्षों में) प्रकाशित (प्रवीण) हो । पिया (परब्रह्म) के प्रेम में मग्न रहे और उधर (ज्ञान के क्षेत्र में) भी उज्जवल हो ।1

यदि कोई ऐसा मिले, तो वह सम्पूर्ण सुध दे सकता है । सभी शब्दों (ग्रन्थों) का रहस्य समझा सकता है और वतन (निजधाम) की विधि (ज्ञान) भी कह सकता है ।2

जो मूल कड़ी (तारतम ज्ञान) को बताए, शास्त्र के छिपे रहस्यों को प्रकट करे और खसम (परब्रह्म) की अखण्ड ठौर (धाम) के विषय में सब कुछ कहे ।3

वह अपने स्वरूप में परब्रह्म की पहचान कराएगा और (धर्मग्रन्थों से) साक्षी देकर इसकी पुष्टि भी करेगा । तब आत्मा को परात्म (धाम के स्वरूप) का साक्षात् दर्शन हो जाएगा ।4



(1) कलस हिन्दुस्तानी 2/49 (2) कलस हि. 2/50 (3) कलस हि. 2/51 (4) कलस हि. 2/52