Logo  Kuljam.org

विषय-सूची

तारतम ज्ञान

तारतम का अर्थ है तम (अन्धकार) से तारने वाला । क्षर से परे अक्षर और अक्षरातीत के ज्ञान को तारतम ज्ञान कहते हैं । उसका प्रकट रूप श्री कुलजम सरूप ग्रन्थ है, जो श्री प्राणनाथ द्वारा इन्द्रावती जी के तन से अवतरित हुआ ।

(श्री राज ने इन्द्रावती जी को दर्शन देकर कहा-) अनादि काल से अब तक जो (तारतम ज्ञान) कभी (किसी ब्रह्माण्ड में) जाहेर नहीं हुआ, तुझे उसकी सुध होगी और निज बुद्धि से वह जाहेर होगा ।1

प्रकटन

आपने (देवचन्द्र जी के अन्दर बैठकर) स्वयं दरबार नहीं खोले, सो मुझ से खुलवाकर (श्री कुलजम सरूप के रूप में) विस्तार किया । मुझे तारतम रूपी पतवार दे दी, सो निश्चित रूप से (मेरी नाव) कहीं नहीं अटकेगी ।2

मुझ (इन्द्रावती) को खास (ब्रह्मसृष्टि) जानकर, मेरी उपजाऊ भूमि (हृदय) को खसम ने जल (प्रेम) से सींचा । उस पर धाम का बीज (तारतम ज्ञान) बोया, सो अपनी गरिमा के अनुरूप उग गया ।3

आत्मा में बोया गया यह बीज (तारतम ज्ञान) निज बुद्धि की संगति में अंकुरित हो गया । इस जिह्वा से इस अंकुर (कुलजम सरूप) के नूर को कैसे कहूं ?4

जब प्रभात का उजाला (तारतम ज्ञान) प्रकट हो गया, तो सत्य के सूरज (प्राणनाथ) को सब देखेंगे (पहचानेंगे) ।5

शक्ति

यह खसम का प्रकाश (कुलजम सरूप) है, सो ढंप कैसे सकता है ? छल (माया) का बल जो उल्टा (परब्रह्म से दूर खींचता) है, उसे यह उड़ा (नष्ट कर) देगा ।6

महिमा

सत्य (तारतम ज्ञान) जो ढंपा नहीं रह सकता, उसने अन्धकार (अज्ञान) को उड़ा दिया । जब तक प्रियतम का नूर (ज्ञान का प्रकाश) फैलेगा नहीं, तब तक दुनिया का आवागमन (जन्म-मरण) कैसे मिटेगा ?7

फल

सब संशयों का निवारण कर दिया । अब निराकार से परे (धाम) के विषय में कोई संशय नहीं रहा । (श्री राज के) हुकम का पालन करते हुए (तारतम ज्ञान को) प्रकाशित करूंगी तथा ब्रह्मसृष्टि और दुनिया को जगाऊंगी ।8



(1) कलस हिन्दुस्तानी 9/34 (2) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/103 (3) कलस हि. 9/9 (4) कलस हि. 9/10 (5) कलस हि. 10/1 (6) कलस हि. 10/4 (7) कलस हि. 10/6 (8) प्रकास हि. 37/104