श्री राज | Shri Raj
परब्रह्म अक्षरातीत को श्री राज भी कहते हैं । वे अपने अखण्ड धाम में अपनी आत्माओं के साथ प्रेम की लीला करते हैं । आत्माएं उन्हें प्रेम से प्रियतम, धाम धनी, पिया, प्राणनाथ, आदि सम्बोधनात्मक नामों से पुकारती हैं ।
श्री श्यामा जी के प्रियतम (श्री राज) सत्य हैं और सदा अखण्ड सुख देने वाले हैं ।1
प्रकास हिन्दुस्तानी 37/2
