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विषय-सूची

प्राणनाथ

यहां प्राणनाथ शब्द का प्रयोग अक्षरातीत परब्रह्म के लिए किया गया है ।

संक्षिप्त परिचय

भविष्य पुराण के अनुसार, बुद्ध कल्कि का अवतार औरंगजेब के शासनकाल में होगा, जब पृथ्वी पर मुसलमानों का शासन होगा । ऐसा माना जाता है कि वह अवतार परब्रह्म की शक्ति से ओत-प्रोत होगा और धर्म की रक्षा करेगा ।

हदीसों के अनुसार, इस्लामी कैलेंडर की ग्यारहवीं शताब्दी में अल्लाह की शक्ति इमाम महदी के रूप में प्रकट होगी । इमाम की लीला दो आत्माएं से होगी और उनके माध्यम से वह 120 साल तक अन्य आत्माओं को जगाने का काम करेंगे । अन्ततः, वह कर्मों के आधार पर इस संसार के लोगों का न्याय करेंगे ।

बाइबल भी ईसा मसीह के दोबारा आगमन की भविष्यवाणी करती है । इस दूसरे आगमन में, उसके साथ चुने हुए लोग (आत्माएं) भी होंगे ।

उपरोक्त सभी भविष्यवाणियां उसी समयावधि का संकेत देती हैं, जब श्री देवचन्द्र और श्री मेहेराज के तन से परब्रह्म की अलौकिक लीला हो रही थी ।

सर्वप्रथम, श्री देवचन्द्र ने इस संसार के लोगों को दिव्य तारतम ज्ञान से परिचित कराया ।

तद्पश्चात्, श्री मेहेराज के तन से परब्रह्म द्वारा विस्तृत लीला की गई और उनके मुख से धाम का ब्रह्मज्ञान श्री कुलजम सरूप प्रकट हुआ । सच्चिदानन्द के स्वरूप की पहचान होने पर सबने उन्हें अपनी आत्मा का स्वामी माना और प्रेम से उन्हें प्राणनाथ, श्री जी, श्री जी साहिब जी कहकर सम्बोधित करने लगे । इन दोनों स्वरूपों की लीला का विस्तृत वर्णन बीतक और श्री प्राणनाथ लीलामृत ग्रन्थ में किया गया है ।

सम्वत् १७३५ में हरिद्वार के महाकुम्भ में सभी सम्प्रदाय के आचार्यों ने एकमत होकर श्री प्राणनाथ को विजयाभिनन्द बुद्ध निष्कलंक स्वरूप माना और उनकी आरती उतारी । बाद में महोबा के काजियों ने उन्हें ईमाम महदी के रूप में स्वीकार किया । बुन्देलखण्ड के महावीर राजा छत्रसाल ने श्री जी साहेब के स्वरूप की पहचान करके तन-मन-धन से उनकी सेवा की ।

प्रकृति की मर्यादानुसार, इस भौतिक लीला को विराम देते हुए श्री प्राणनाथ जी पन्ना के गुम्मट मन्दिर में विराजमान हो गए । जिस परब्रह्म का दर्शन नारायण के लिए भी दुर्लभ है, यदि हमें सुगमता से उनकी चरण-रज प्राप्त होती है तो ऐसे सुनहरे अवसर को खोना नहीं चाहिए । सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, मुक्तिदाता, ईश्वरों के ईश्वर, साक्षात् परमात्मा स्वरूप श्री प्राणनाथ जी के समक्ष समर्पण करना ही आज हमारा सबसे बड़ा धर्म है ।

महिमा

कुरआन या पुराण, यह दोनों प्रमाण ग्रन्थ हैं । इनके गुह्य अर्थ हमारे पास हैं, जो अन्दर बैठकर प्राणनाथ (श्री राज) खोल रहे हैं ।1

साक्षात् अखण्ड सूर्य (अक्षरातीत) का उदय (प्रकटन) हुआ है ।2

(योगमाया में) उनका दीदार करने के लिए विश्व एकत्रित होगा और संसार में कोई पीछे नहीं रहेगा । ब्रह्मसृष्टि को प्रियतम के संग जो सुख मिला है, उसको मुख से कहा नहीं जा सकता ।3

श्री धनी जी (श्री प्राणनाथ) का दीदार करके सारी दुनिया एक (मत) हो जाएगी । कोई किसी को कुछ नहीं कहेगा और किसी के मन में क्रोध या विरोध नहीं रहेगा ।4

श्री धनी जी (श्री प्राणनाथ) का ऐसा यश है कि दुनिया अपने आप एकरस हो जाएगी । उनके ज्ञानमय स्वरूप का ऐसा तेज है कि किसी के मन में कोई भी संशय नहीं रहेगा ।5



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/102 (2) प्रकास हि. 37/107 (3) प्रकास हि. 37/108 (4) प्रकास हि. 37/110 (5) प्रकास हि. 37/111