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विकार | Vikar

काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, आदि माया के विकार हैं और इनके कारण बाद में दुःख का अनुभव होता है ।

विकार का कारण

साथ (के मन) में कालमाया का अंश है, जिससे उनके अन्दर विकार बढ़ गए हैं । सो उसे मैं अपनी शीतल (प्रेममयी) नजरों और तारतम (ज्ञान) रूपी साबुन से गला दूंगी ।1

विकारों से छूटने का मार्ग

जब यह (श्री कुलजम सरूप के ज्ञान के) सुख अंग (हृदय) में आते हैं, तब (माया के) विकार छूट जाते हैं और प्रियतम अक्षरातीत के अखण्ड घर (धाम) का आनन्द मिलता है ।2



(1) कलस हिन्दुस्तानी 21/18 (2) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/6