अन्तःकरण | Antahkaran
अन्तःकरण जीव से जुड़ा एक सूक्ष्म अंग है, जिसे हृदय या दिल भी कहते हैं । यह स्थूल हृदय से भिन्न है, परन्तु यह भी शरीर की भांति जड़ है ।
संसार के प्रत्येक प्राणी के अन्दर चेतन जीव होता है, जो अन्तःकरण के माध्यम से ही अपने शरीर को संचालित करता है । जब जीव एक शरीर को छोड़कर दूसरा शरीर धारण करता है, तब भी यह अन्तःकरण उसके साथ जाता है । अन्तःकरण के चार अंग हैं । श्रेष्ठता के क्रम में ऊपर से नीचे की ओर उन चार अंगों के नाम निम्नलिखित हैं-
अन्तःकरण की कार्यशैली को समझे बिना अध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ना कठिन है । जीव के अधीन है- अहंकार । अहंकार के अधीन हैं- बुद्धि और चित्त । बुद्धि और चित्त के अधीन है- मन । मन के अधीन है- इन्द्रियां (शरीर) । जीव से लेकर इन्द्रियों तक क्रमशः स्थूलता बढ़ती जाती है ।
