Logo  Kuljam.org

विषय-सूची

हांसी

हांसी का अर्थ है उपहास करना ।

हंसी की भूमिका

यहां पर उस प्रसंग का वर्णन है जब अक्षरातीत ने अपनी सखियों के साथ हांसी की ।

तब हमने जाकर पिया (प्रियतम) से कहा कि हम अक्षर का खेल देखना चाहती हैं । जब यह बात पिया ने सुनी, तब अत्यधिक हांसी (उपहास) करने के उद्देश्य से मना किया ।1

संसार में हंसी का कारण

जो (इन वचनों को) सुन कर (प्रियतम को पाने के लिए) दौड़ी नहीं, तो उन पर हंसी होगी । जिन में जैसा इश्क है, सो अब जाहिर हो जाएगा ।2

यदि किसी ने गफलत (असावधानी) करी और अपना दिल देकर जागी नहीं, सो यहां लोक (जागनी लीला) एवं अलोक (साक्षात्कार, प्रेम व आनन्द) का कुछ भी लाभ नहीं ले सकेगी । (वह सखी) लाभ तो नहीं ले सकेगी, परन्तु (धाम में) सबके सामने उसकी हंसी होगी । हे सुहागन ! अब यह हंसी तो कोई मत कराओ ।3

हंसी का दुःख

सैयन (सखियों) को इस हंसी का भी दुःख न उपजे । यदि यह दुःख (धाम के) सुखों के बीच में याद आ जाए, तो यह दुःख भी सुहागन के लिए बुरा (लज्जाजनक) होगा । यह (हंसी का) दुःख तो निश्चित रूप से बुरा है और मेरी सैयों से सहा नहीं जाएगा ।4



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/19 (2) कलस हिन्दुस्तानी 11/26 (3) कलस हि. 11/28,29 (4) कलस हि. 11/30,31