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पुरदल खान की पाती का उत्तर

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग १३५

जब से श्री जी साहिब जी पन्ना आए, तभी से दज्जाल ने शोर करना शुरु कर दिया ।

पुरदल खान ने श्री जी को पाती लिखकर पूछा- "आप क्यों कहते हैं कि कयामत आ गई ? उसकी मुद्दत (समय) दूर है, फिर आप उसे आज क्यों बताते हैं ?"

श्री जी ने उत्तर लिखा-

"तुमने किस किताब से तहकीक (निश्चित) किया कि कयामत दूर है ? कुरान के लिखे अनुसार तो कयामत के सात निशान जाहिर हो चुके हैं ।

"बिना रोशनी का (ज्ञान का) सूर्य मगरब (पश्चिम, हिन्दुओं) से उग चुका है, तुम अन्दर की नजर से देखो । दाभ-तुल-अर्ज जानवर जाहिर हो चुका है (मनुष्य का स्वभाव पशुओं जैसा हो गया है) । दज्जाल का जोर इतना बढ़ गया है कि उसने सबका ईमान छीन लिया है और दीन में शोर (झगड़ा) हो रहा है ।

"तुम आजूज-माजूज (मृत्यु) की राह देखते हो, वे भी जाहिर हो चुके हैं । इस्लाम (निजानन्द) पर चलने वाले लोगों ने देखा कि कैसे आजूज-माजूज (मिर्गी की महामारी) ने लोगों को खाया (मारा) ।

"इस्राफील फरिश्ते ने सूर फूंका, मतलब इमाम महदी के तन से कुरान (श्री कुलजम सरूप) को गाया, जिसे खास मोमिन ध्यान से सुनते हैं । हजरत ईसा (श्री देवचन्द्र जी) आ चुके हैं । इमाम महदी ने तमाम लोगों को पैगाम भेजकर हकीकत और मारफत की राह पकड़ने की दावत (निमन्त्रण) दी ।

"आज तुम नींद (अज्ञानता) में सो रहे हो, इसलिए ऐसे शब्द लिखकर भेजे । तुम बिना नसीब (भाग्य) के कर भी क्या सकते हो ? यह काम तो ईमान लाने वाले मोमिनों का है । अब तुम पर कयामत की हकीकत जाहिर होगी । कुरान में कयामत की जो साइत (तिथि) लिखी है, वह बहुत नजदीक (निकट) है ।

"रामनगर में तुम्हारे अहदी (प्रतिनिधि) आए थे । वे लोग हमारी बात की तहकीक (सुनिश्चित) कर गए हैं, फिर भी तुम्हें खबर नहीं पड़ी । अब तुम बहुत हल्के (ईमान से रहित) हो । जैसे तूल (कपास का धुआं) बिना हवा के उड़ता है, तुम्हारा भी वैसा हाल होगा और तुम्हें कोई शूल (कष्ट) नहीं रहेगा ।"

श्री जी ने ऐसी पाती लिखकर पुरदल खान को भेज दी । फिर उसने कोई उत्तर नहीं दिया । अंकुर न होने के कारण वह लाभ नहीं ले सका ।

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