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माध्व सम्प्रदाय के आचार्यों से संवाद

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग ७२

माध्व सम्प्रदाय के आचार्य ने श्री प्राणनाथ जी से कहा-

"आप हमारी सम्प्रदाय के गोत्र, क्षेत्र, धाम, वेद, आदि के विषय में सुनिए ।

"हमारी शाला अवन्तिका पुरी (उज्जैन) है । हमारा क्षेत्र नैमिषारण्य (सीतापुर) है । अंगों को तपाना (तपस्या करना) ही हमारा सुख-विलास है । हमारा धाम बद्रीनाथ है ।

"हमारा तीर्थ अलकनन्दा नदी है । हम ब्रह्मा जी की उपासना करते हैं । हमारी इष्ट सावित्री (सरस्वती) हैं । हम ऋग्वेद को मानते हैं ।

"हम अपने हृदय में हरि नाम की माला जपते हैं और विष्णु गायत्री का गायन करते हैं । भगवान विष्णु के हंस रूप का हमारा मन्त्र है । हमारे आचार्य ब्रह्मा हैं ।

"हमारे देवता हंस ऋषि हैं । यह सम्प्रदाय ब्रह्मा जी ने शुरु किया है । हमारी मुक्ति सालोक्य है । यह माध्व सम्प्रदाय की पद्धति है ।"

तब श्री प्राणनाथ जी ने प्रश्न किया- "आपने तो इस जगत के अन्दर की सब बात की है । वेद कहते हैं कि यह जगत भ्रम (नश्वर) है, तब आपके द्वारा कही गई मुक्ति कहां मिलेगी ?"

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