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ईश्वरी सृष्टि | Ishwari Srishti

अक्षर की आत्माओं को ईश्वरी सृष्टि कहते हैं । इनकी संख्या 24000 बताई गई है ।

परब्रह्म के साथ ईश्वरी सृष्टियों का संसार में दो बार आगमन हुआ । पहली बार उन्होंने ब्रज लीला और रास लीला में भाग लिया । दूसरी बार उन्होंने जागनी लीला में भाग लिया, जो वर्तमान में भी चल रही है ।

और जो कुमारिका सखियां (ईश्वरी सृष्टि) ब्रज वधुओं के साथ रहती थीं, यह सभी अक्षर की सुरताएं थीं । इन्होंने व्रत करके श्याम से (रास में) मिलन किया । इनके मूल शरीर धाम में नही हैं ।1

बांसुरी सुनकर कुमारिका सखियां भी चल पड़ीं और भवसागर के पार उतरीं । इनकी सुरत (आत्मा) सभी सखियों में मिल गई । रास में इनका अलग स्वरूप नहीं था ।2

इस प्रकार कुमारिका सखियों को (योगमाया में) मुक्ति मिल गई ।3



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/36 (2) प्रकास हि. 37/37 (3) प्रकास हि. 37/38