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न्याय की लीला | Nyay Leela

जागनी लीला के अन्तिम चरण में योगमाया में न्याय की लीला होगी । इसमें संसार के सभी प्राणियों का न्याय परब्रह्म स्वरूप श्री प्राणनाथ करेंगे ।

कतेब पक्ष में इसी के बारे में कहा गया है कि कयामत के समय आखिरी इमाम कज़ा करेंगे ।

जिसने जैसे कर्म किए हैं, भले या बुरे, तब सबकी करनी सामने आ जाएगी ।1

तब कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा । सबको अपने दुःख-सुख (कर्मफल) को स्वयं भुगतना होगा । अब ब्रह्मसृष्टियों को एकत्रित करती हूं । साक्षात् अखण्ड सूर्य (अक्षरातीत) का उदय (प्रकटन) हुआ है ।2

उनका दीदार करने के लिए विश्व एकत्रित होगा और संसार में कोई पीछे नहीं रहेगा ।3

ब्रह्मसृष्टि का ऐसा नूर (महिमा) है कि जो दुनिया अंकूर (बेहद में मूल तन) के बिना थी, उनके लिए नए अंकूर बनाकर उन्हें अपनी कृपादृष्टि से अखण्ड मुक्ति दे देंगी ।4

श्री धनी जी (श्री प्राणनाथ) का दीदार करके सारी दुनिया एक (मत) हो जाएगी । कोई किसी को कुछ नहीं कहेगा और किसी के मन में क्रोध या विरोध नहीं रहेगा ।5

श्री धनी जी (श्री प्राणनाथ) का ऐसा यश है कि दुनिया अपने आप एकरस हो जाएगी । उनके ज्ञानमय स्वरूप का ऐसा तेज है कि किसी के मन में कोई भी संशय नहीं रहेगा ।6

सब जातियां एक स्थान पर (योगमाया में) एकत्रित होंगी । कोई नहीं कहेगा कि उसका परमात्मा अलग है । प्रियतम के विरह से निर्मल होने के पश्चात् सबको अखण्ड सुख (मुक्ति) दिए जायेंगे ।7



(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/106 (2) प्रकास हि. 37/107 (3) प्रकास हि. 37/108 (4) प्रकास हि. 37/109 (5) प्रकास हि. 37/110 (6) प्रकास हि. 37/111 (7) प्रकास हि. 37/112