Kuljam.org

विषय-सूची

अरब में खेता भाई से भेंट

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग २५

वि.सं. १७०३ में धनी श्री देवचन्द्र जी ने श्री मेहेराज से कहा- "गांगजी भाई के भ्राता खेता भाई पिछले २५ वर्ष से अरब में रहते हैं । उनके पास धन की अधिकता है । यदि वे सहयोग करें, तो जागनी कार्य निर्बाध चलता रहेगा । इसलिए तुम अरब जाकर उनको सुन्दरसाथ में शामिल करो । यदि यह कार्य हो गया, तो इसकी शोभा तुम्हें मिलेगी ।"

श्री मेहेराज ने सद्गुरु के इस आदेश को शिरोधार्य किया । वे फाल्गुन मास के मध्य में नाव से ४० दिन की यात्रा करके अरब पहुंचे । वहां खेता भाई को उन्होंने गांगजी भाई का पत्र दिया । श्री मेहेराज से मिलकर खेता भाई को बहुत प्रसन्नता हुई और उन्हें अपने साथ रख लिया ।

खेता भाई ने अपने गोदाम का सारा कार्यभार श्री मेहेराज को सौंप दिया । श्री मेहेराज ने उन्हें समझाया कि वे बहुत धन जमा कर चुके, अब उन्हें नवतनपुरी वापस चलना चाहिए । फिर श्री मेहेराज ने उन्हें तारतम ज्ञान के अमूल्य वचनों से प्रबोधित करने का प्रयास किया, परन्तु उन पर ज्ञानभरी बातों का कोई असर नहीं हुआ ।

श्री मेहेराज चार वर्ष तक अरब में रहकर खेता भाई का व्यापार समेटते रहे, किन्तु तभी अचानक एक दिन खेता भाई की मृत्यु हो गई । उस समय श्री मेहेराज बाहर गए हुए थे और पीछे से हाकिम ने खेता भाई की सारी धन-सम्पत्ति व गोदाम पर कब्जा कर लिया ।

जब श्री मेहेराज लौटे और सम्पत्ति पर अपना अधिकार जताया, तो हाकिम शेख सल्ला ने उन पर भी बुरी दृष्टि डाली । अब श्री मेहेराज रात-भर यात्रा करके पहाड़ों पर चले गए ।

अगला प्रसंग- सुल्तान से फरियाद