विष्णु श्याम सम्प्रदाय के आचार्यों से वार्ता
श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग ७१
विष्णु श्याम सम्प्रदाय के आचार्य ने श्री प्राणनाथ जी से कहा-
"अब हम अपने सम्प्रदाय के इष्ट, उपासना, वेद, मन्त्र, आदि के विषय में बताते हैं, आप ध्यान से सुनिए ।
"हमारी शाला विष्णु कांची (कांचीपुरम) है । हमारा तीर्थ श्वेत गंगा चक्र है । हमारे सुख-विलास का स्थान इन्द्रियों के दमन में है, जहां सब निर्मल हो जाते हैं ।
"हमारा क्षेत्र मार्कण्डेय है । हमारा धाम पुरुषोत्तम पुर (वैकुण्ठ) है । हमारी इष्ट लक्ष्मी हैं । भगवान जगन्नाथ की सेवा करना ही हमारी उपासना है ।
"हमारा वेद अथर्व है । हम इष्ट के नाम की माला जपते हैं । हमारा गोत्र अच्युत है । हमारी शाखा त्रिपुरारी है । हमारा वर्ण शुक्ल है और हम तुलसी मन्त्र का जाप करते हैं । हमारे देवता जलबिम्ब ऋषि हैं और हमारे आचार्य वामदेव हैं ।
"हम ब्रह्म गायत्री को मानते हैं । भगवान महादेव (शिव जी) से हमारा सम्प्रदाय प्रारम्भ हुआ है । हम सायुज्य मुक्ति को मानते हैं । यह विष्णु श्याम सम्प्रदाय की पद्धति है ।"
इनकी पद्धति सुनकर श्री जी ने कहा- "यह तो आपने जगत के अन्दर की सब बातें कही हैं । वेद-पुराण में लिखा है कि प्रलय में जगत का नाश हो जाता है, तब आपका सम्प्रदाय कहां रहता है ?"
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