प्रतिबिम्ब लीला | Pratibimb Leela
जब तीसरी बार अक्षरातीत के आदेश से चौदह लोक का ब्रह्माण्ड बना, तो सर्वप्रथम अक्षर की सुरताओं द्वारा प्रतिबिम्ब लीला की गई ।
यह जो काल माया का इण्ड उपजा है, इसे सब वही (पुराना) ब्रह्माण्ड समझते हैं । यह तीसरा इण्ड जो अब नया बना है, सब अक्षर की सुरत का है ।1
उसी (अक्षर की) सुरत से सखियां बनीं, जो प्रतिबिम्ब की सखियां और वेद ऋचाएं हैं ।2
इसी इण्ड में श्री कृष्ण जी 11 दिन तक ब्रज और मथुरा में रहे ।3
जो 11 दिन तक ग्वालों के भेष में रहे, उनमें प्रियतम (अक्षरातीत) का आवेश नहीं था । वे 7 दिन गोकुल और 4 दिन मथुरा में रहे ।4
गोकुल में श्री कृष्ण ने सात दिन तक सखियों के साथ रास की प्रतिबिम्ब लीला करी । यह लीला अखण्ड योगमाया में हुई रास लीला की नकल थी ।
यह प्रतिबिम्ब की लीला जो यहां (संसार में) हुई, सो ब्रह्मसृष्टि के सत्य को प्रकट करने के लिए हुई ।5
यदि दो बार प्रकट रूप से लीला (रास) नहीं होती, तो असल-नकल की सुध कैसे होती । इसी कारण यह नकल (प्रतिबिम्ब की लीला) हुई, जिससे सम्पूर्ण संसार को (असल रास लीला की) सुध हो सके ।6
इसके बाद चार दिन तक श्री कृष्ण मथुरा में रहे ।
(मथुरा में) उन्होंने हाथी, पहलवानों और कंस का कार्य (वध) किया । उग्रसेन को टीका दिया (राज्याभिषेक किया) । जिसने काला ग्रह में दर्शन दिया था, उसी ने आकर बन्ध को छुड़ाया ।7
वसुदेव और देवकी के लोहे (बेड़ियों) को कटवाया । उन (श्री कृष्ण) ने (ग्वालों का) भेष उतारकर स्नान किया । जब राजसी बागे (वस्त्रों) का श्रृंगार किया, तब उन का बल-पराक्रम नहीं रहा ।8
भेष बदलते ही श्री कृष्ण के अन्दर विराजमान शक्ति चली गई । इसके पश्चात् श्री कृष्ण के तन से भगवान विष्णु की अवतार लीला प्रारम्भ हो गई । दूसरी तरफ, प्रतिबिम्ब की सखियों के तन से 100 वर्ष तक विरह की लीला होती रही ।
उद्धव ने जिन्हें योग का ज्ञान दिया, सो प्रेम लीला करने वाली प्रतिबिम्ब की सखियां उसे कैसे मान सकती थीं ।2
उद्धव ने जो सिखापन दिया, सो उसके मुख पर वचन दे मारे । (उन सखियों ने) इसी विरह में देह का त्याग कर दिया और वहां पहुंच गयीं जहां प्रेम के स्वरूप (श्री कृष्ण) हैं ।9
अक्षर के हृदय (सबलिक) में रास अखण्ड कही गई है । यह प्रतिबिम्ब के साथ (सखियां) भी वहीं पहुंच गए ।5
(1) प्रकास हिन्दुस्तानी 37/52 (2) प्रकास हि. 37/53 (3) प्रकास हि. 37/57 (4) प्रकास हि. 37/58 (5) प्रकास हि. 37/55 (6) प्रकास हि. 37/56 (7) प्रकास हि. 37/59 (8) प्रकास हि. 37/60 (9) प्रकास हि. 37/54
