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मुस्लिम अधिकारियों को समझाने की शर्त

श्री प्राणनाथ लीलामृत - प्रसंग ११३

जब श्री जी ने राजा भाव सिंह से कुरान की बात की, तब राजा ने विचार करके कहा- "आप इस बात को प्रमाणित कर दीजिए । मेरे दरबार में चार मुसलमान हैं । आप उन्हें कयामत की बात समझा दीजिए । तब मैं धर्म के लिए कमर कसकर औरंगज़ेब से अवश्य लड़ूंगा ।"

श्री जी ने कहा- "आप उन मुसलमानों को मेरे पास भेजिए । मैं उन्हें कुरान से समझाऊंगा और वे ईमान ले आएंगे । वे स्वयं आकर आपसे कहेंगे कि मेरा मार्ग ही सच्चा इस्लाम है और कुरान में भी हमारी बात कही गई है ।"

राजा भाव सिंह ने यह बात मान ली । श्री जी नित्य कुरान की चर्चा करने लगे ।

राजा भाव सिंह के अधिकारियों में सबसे पहले अव्वल खान श्री जी का दीदार करने आया । वह पहले उदयपुर में उनसे मिल चुका था । श्री जी को देखते ही उसने अपने परवरदिगार को पहचान लिया । उसने जहान मुहम्मद और मिहीन खान को भी श्री जी का परिचय दिया और वे दोनों चर्चा सुनकर पहचान करने लगे ।

मिहीन खान को भी ईमान आ गया और वह श्री जी के सामने नतमस्तक हो गया । शोभा पाने की इच्छा से वह अन्य मुसलमानों को भी श्री जी की शरण में जाने के लिए प्रेरित करने लगा ।

जब श्री जी की कहारबान पठानों से चर्चा चल रही थी, तब जहान मुहम्मद ने सनन्धें सुनी पर उसे पहचान न हो सकी । सिर्फ जहान मुहम्मद के अन्दर परमधाम का अंकुर था । उसे पूरी कुरान का अर्थ स्मरण था और पढ़े-लिखे लोगों में वह अरबी खान के नाम से जाना जाता था । वह सभी पठानों को कुरान की तालीम (शिक्षा) देता था । जिसे पता चलता कि वह श्री जी की चर्चा सुनने जाता है, वे अपनी अटकल से उसकी निंदा करते ।

जहान मुहम्मद ने दो मास तक श्री जी की चर्चा सुनी और वह प्रभावित भी हुआ, परन्तु उसका ज्ञान अधपका था । जब उसने लालदास और उत्तम दास से परमधाम की लीला का वर्णन सुना, तो उसका ईमान डगमगा गया और वह झगड़ा करके चला गया ।

उत्तम दास ने श्री जी से पूछा- "क्या मैं जहान मुहम्मद को बुलाने जाऊं ?"

श्री जी ने मना करते हुए कहा- "उसके मन में संशय हो गया है, परन्तु वह घर में नहीं रह सकेगा क्योंकि उसने मेरी चर्चा सुन रखी है । वह प्रातः दौड़ता हुआ यहां आएगा ।"

दूसरे दिन जहान मुहम्मद स्वयं श्री जी के पास आकर बोला- "आप मुझे क्यों नहीं समझाते ? मैं अल्लाह की रहमत (दर्शन) पाना चाहता हूं ।"

श्री जी ने कहा- "तुम आठ दिन चित्त देकर एक-एक प्रहर (तीन घण्टे) मेरी चर्चा सुनो । तब देखो तुम्हें कैसा अनुभव होता है ।"

जहान मुहम्मद चर्चा सुनने आ गया । उसने कुछ प्रश्न किए- "कयामत के रोज में मुर्दे कैसे उठेंगे ? दुनिया किस कारण बनाई गई ?"

तब श्री जी ने उसे विस्तार से समझाया-

"इश्क रब्द के कारण मोमिन इस दुनिया में उतर आए । दूसरा कारण, नूर जलाल (अक्षर) ने मांगा था कि उन्हें रूहों का इश्क (प्रेम लीला) देखने को मिले । इसलिए पहले दो बार में दो ब्रह्माण्ड (ब्रज और रास) दिखाए ।

"तीसरी बार, यह नया इण्ड बनाया गया । रास लीला करने वाले श्याम (अक्षर) अरब में मुहम्मद बनकर आए, जो अल्लाह का पैगाम लाए । उन्होंने वादा किया कि वे दोबारा दसवीं और ग्यारहवीं सदी में आएंगे, जब ब्रज-रास वाली आत्माएं पुनः आएंगी ।

"तब हक (श्री जी साहिब जी) काज़ी बनकर सबका हिसाब लेंगे । सब एक दीन (धर्म) में आ जाएंगे और ईमान ले आएंगे । नूर (अक्षर) और नूर तजल्ला (अक्षरातीत) जाहिर हो जाएंगे और उनके बिना किसी अन्य की पूजा नहीं होगी ।

"जब नूरजलाल (अक्षर) की नींद उड़ जाएगी और वे जागनी लीला को याद करेंगे, तब आठ बहिश्तों में सभी प्राणियों को मुक्ति मिल जाएगी । जो इस कब्र (नश्वर शरीर) में रहते हुए ईमान लाए, उन्हें भी नूर (अक्षर) याद करेंगे और बहिश्त देंगे । इस तरह कयामत में कब्रों से मुर्दे उठेंगे ।"

श्री जी ने कयामत के समय का ऐसा वर्णन करके जहान मुहम्मद को सुनाया । ज्ञान का यह द्वार खुलते ही उसे जोश आ गया । उसके अन्दर बैठा दज्जाल (अज्ञान) मिट गया और तीसरे दिन ही जहान मुहम्मद ईमान ले आया ।

अब जहान मुहम्मद, अव्वल खान और मिहीन खान नित्य चर्चा में बैठने लगे । इनके अतिरिक्त अन्य मुसलमान भी आकर चर्चा सुनने लगे । चर्चा के समय जहान मुहम्मद को जोश आ जाता था, तब श्री जी उसके सिर पर हाथ रखकर दिलासा देते कि तू हमारा साथी है । जब वह लाहूत (परमधाम) का नाम सुनता, तो पुनः जोश में आकर कयामत को याद करने लगता ।

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